मईया के गीति -४
सातों मईया की हथवा में लाल के छड़ी हे गुलाब छड़ी
मईया कबसे रउरा आईके आँगन में खड़ी ।
आँगन में खड़ी हो आगन में खड़ी मईया हमके* सिंदुरवा
भीखिया देईके चलीं मईया हमके बालाकवा भीखिया देईके चलीं.
*घर भरि की मेहरारू लोगनि के नाम जोड़ी के गावल जाई.
गुरुवार, 17 दिसंबर 2009
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