सोहर
मचिया ही बईठल कौशिल्या रानी, सिहाँसन राजा दशरथ हो
राजा बिनु रे बदरी कहीं कजरी कहाँ जाई बरसेले हो
बोलिया त बोलेली रानी बोलही नाहीं पावेली हो
रानी बीनू हो ग़रभ के तिरियवा होरीला नाही जनमत सुनत सुख सोहर हो
एतना बचन रानी सुनली सुनहि नाही पावेली हो
रानी हाथे गोड़े तानेली चदरिया सुतेली कोपवाघर हो (कोपभवन)
सोने के खडौउआ राजा दशरथ केकयी महल चले
रानी तोरे बहिना बड़े रे वियोगावा त चली के मनावहु हो
एक हाथ लेली केकयी दतुअनि दुसरे हाथ पानी हो
केकयी झटकि के चढ़ेली अटरिया त बहिना मनावन हो
उठहु इ बहिना उठहु कहल मोर मानहु
बहिना उठिके करहु दतुअनिया होरिल तोरे होईहे सुनीह सुख सोहर हो
कवनाहिं मासे गंगा बढ़ियईहें सवार दहे लगिहन हो
बहिनी कवनही मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
सावन मासे गंगा बढ़ियईहें सेवर दहे लगिहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमेलें त बचन पूरण भईलें
सब सखि तेल लगावेली मंगल गावेली
रानी केकयी के जीयरा भे रोग सुनीके नाहि आवेली
सोने के खड़उआँ राजा दशरथ केकयी महल चलें
रानी कवन अवगुन मोसे भईलें सुनीके नाहि आवेलू हो
ना हम तेल लगाईब ना ही मंगल गाईबी राजा हो
ब्रम्हा के बान्हल पिरितिया उलटी राउरे दिहली।
सोहर पुत्र की जनम की अवसर पर धूम धाम से गावल जाला।
पुत्री की जनम पर पहिले सोहर ना गावल जात रहल ह बाकिर अब त गावल जाता।
ए सोहर में एगो ध्यान देबे वाली बाति बा राम के जनम हो गईल बा बाक़ी रानी कैकेयी के भारत के जनम अबे नईखे भईल। इसे राजा के कैकेयी पुत्र के राज देबे के बरदान गलत हो गईल बा।
राजा बिनु रे बदरी कहीं कजरी कहाँ जाई बरसेले हो
बोलिया त बोलेली रानी बोलही नाहीं पावेली हो
रानी बीनू हो ग़रभ के तिरियवा होरीला नाही जनमत सुनत सुख सोहर हो
एतना बचन रानी सुनली सुनहि नाही पावेली हो
रानी हाथे गोड़े तानेली चदरिया सुतेली कोपवाघर हो (कोपभवन)
सोने के खडौउआ राजा दशरथ केकयी महल चले
रानी तोरे बहिना बड़े रे वियोगावा त चली के मनावहु हो
एक हाथ लेली केकयी दतुअनि दुसरे हाथ पानी हो
केकयी झटकि के चढ़ेली अटरिया त बहिना मनावन हो
उठहु इ बहिना उठहु कहल मोर मानहु
बहिना उठिके करहु दतुअनिया होरिल तोरे होईहे सुनीह सुख सोहर हो
कवनाहिं मासे गंगा बढ़ियईहें सवार दहे लगिहन हो
बहिनी कवनही मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
सावन मासे गंगा बढ़ियईहें सेवर दहे लगिहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमेलें त बचन पूरण भईलें
सब सखि तेल लगावेली मंगल गावेली
रानी केकयी के जीयरा भे रोग सुनीके नाहि आवेली
सोने के खड़उआँ राजा दशरथ केकयी महल चलें
रानी कवन अवगुन मोसे भईलें सुनीके नाहि आवेलू हो
ना हम तेल लगाईब ना ही मंगल गाईबी राजा हो
ब्रम्हा के बान्हल पिरितिया उलटी राउरे दिहली।
सोहर पुत्र की जनम की अवसर पर धूम धाम से गावल जाला।
पुत्री की जनम पर पहिले सोहर ना गावल जात रहल ह बाकिर अब त गावल जाता।
ए सोहर में एगो ध्यान देबे वाली बाति बा राम के जनम हो गईल बा बाक़ी रानी कैकेयी के भारत के जनम अबे नईखे भईल। इसे राजा के कैकेयी पुत्र के राज देबे के बरदान गलत हो गईल बा।
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