जन्मोत्सव गीत- छठवें दिन पर
मंगलवार, 28 दिसंबर 2010
रविवार, 26 दिसंबर 2010
खिलौना _2
खिलौना
पुत्र जन्म पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला लोकगीत.
यह सोहर के बाद हास्य के लिए गाया जानेवाला मनोरंजन प्रधान गीत है.
पुत्र जन्म पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला लोकगीत.
यह सोहर के बाद हास्य के लिए गाया जानेवाला मनोरंजन प्रधान गीत है.
शनिवार, 25 दिसंबर 2010
खिलौना
खिलौना
हमरी अरविंद बाबू के भईलें नंदलाल दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के बड़े पापा फिरी कईले बाड़े बाबू के बड़े पापा फिरी कईले बाड़े
मेरठ शहर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के बड़ी मम्मी फिरी कईले बाड़ी बाबू के कामना मम्मी फिरी कईले बाड़ी
छुपावल पईसा हजार दूअरवा पर बाजा बाजे
हमरी ब्रजेश बाबू के भईलें नंदलाल दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के पापा फिरी कईले बाड़े बाबू के पापा फिरी कईले बाड़े
नोएडा शहर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
दिल्ली शहर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के मम्मी फिरी कईले बाड़ी बाबू के प्रियंका मम्मी फिरी कईले बाड़ी
पांडव नगर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के बाबा फिरी कईले बाड़े बाबू के बाबा फिरी कईले बाड़े
सलेमपुर शहर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के दादी फिरी कईले बाड़ी बाबू के दादी फिरी कईले बाड़ी
ठोकावा के पईसा हजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के बुआ फिरी कईले बाड़ी बाबू के बुआ फिरी कईले बाड़ी
देवरिया के पईसा हजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के फूफा फिरी कईले बाड़े बाबू के फूफा फिरी कईले बाड़े
देवरिया शहर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के मौसा फिरी कईले बाड़ी बाबू के मौसा फिरी कईले बाड़ी
गोरखपुर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के मौसी फिरी कईले बाड़ी बाबू के मौसी फिरी कईले बाड़ी
हरीनगर के बाजार दूअरवा पर बाजा बाजे
बाबू के भैया फिरी कईले बाड़े बाबू के भैया फिरी कईले बाड़े
आपन खिलौना हजार दूअरवा पर बाजा बाजे
सोहर
सोहर
रुकुमिनी लिपी अईली पोति अईली छतीस दियना बारि अईली हो
आरे बीनू रे होरील के ओबरिया त झहर झहर करे
एक रे पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली हो
आरे पांचही आम के घवदिया खोईन्छा कहू डालेला
दूसरा पहर रुकुमिनी सूतली त सपन एक देखेली हो
आरे कोरी नदीयवा के दहिया जंगलवा कहू धईल
तीसरा पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली
आरे लाल बरन के घुनघुनावान सेजीयावा पर धईल.
चौथा पहर रुकुमिनी सूतेली सपन एक देखेली हो
आरे सावरेन वरन के होरीलवा सेजीयवा पर खेलेला
सोहर
सोहर
अपने ओसरवां कोशिल्या रानी राम के उलारेली राम के दुलारेली हो
आरे उलटी उलटी राम के देखेली देखत नीक लागेला
भीखिया मांगत दुई ब्राह्मण रानी से अरज करें
रानी कवन कवन तप कईलू त राम गोदी बिहसेले
माघ ही मॉस नहईलीं अगिनी नाही तपली हो
ए ब्राह्मन जेठ नाही बेनिया दोलावली त राम गोद बिहसेलें हो
कातिक मॉस नहईलीं तुलसी दियना बरीलें हो
ए ब्राह्मन कातिक में आवलाँ के दान कईलीं त राम गोदी बिहसेलें हो
भूखल रहलीं एकादशी त द्वादशी के पारण करीं
ए ब्राह्मण भूखले में विप्र के जेववलीन त राम गोद बिहसेलें
बुधवार, 20 जनवरी 2010
सोहर
सोहर
दशरथ लाल बंगलवा त पानन छावल हो बहीनी सूती के उठेलें राजा दशरथ दुवरवा पर ठाढ़ भईले
अपने ओसरवा हेलिनिया त हेलावा से बात करे , हो हेला देखलीं निरबंसी के मुहवा दईबा कुशल डारेले
इतना बचन राजा सुनलें सुनाही नाही पावलें हो राजा गोड़ मुड़ तानेले चदरिया सोवेले धवरोहड़ि
पईठी जगावेली कोशिल्या रानी सुनी राजा दशरथ हो राजा अवंटल दुधवा सेरईले भोजनियाँ रउरे बिगदेले
भले बौरैइलू कौशिल्या रानी केही बौरावल ho raanii jatiiyaa ke patarii
रविवार, 3 जनवरी 2010
सोहर-गारी
रघुबर के बहिना रानी रुकुमिनी
चार ही भईया के बहीनीया पनिहारिनी हो
धवार बछारुआ के मूत छिटिकी परी गईले
गर्भ रही गईले हो
भईया जे बईठे जेवनरवाँ भौउजी अगिया लावेली हो
प्रभु राउर बहिनी ग़रभ जनावेली थुकीय थूक घर भरे हो
भईया बहीना बोलावेलें बगल बैठावेले
बहिना कवने बलकावा लोभईलू टी ग़रभ जनावेलू
चार ही भईया के बहीनीया बहिनि पनिहारिनी
भईया ghavare बछारुआ के muutavaa
चार ही भईया के बहीनीया पनिहारिनी हो
धवार बछारुआ के मूत छिटिकी परी गईले
गर्भ रही गईले हो
भईया जे बईठे जेवनरवाँ भौउजी अगिया लावेली हो
प्रभु राउर बहिनी ग़रभ जनावेली थुकीय थूक घर भरे हो
भईया बहीना बोलावेलें बगल बैठावेले
बहिना कवने बलकावा लोभईलू टी ग़रभ जनावेलू
चार ही भईया के बहीनीया बहिनि पनिहारिनी
भईया ghavare बछारुआ के muutavaa
सोहर
सोहर
मचिया ही बईठल कौशिल्या रानी, सिहाँसन राजा दशरथ हो
राजा बिनु रे बदरी कहीं कजरी कहाँ जाई बरसेले हो
बोलिया त बोलेली रानी बोलही नाहीं पावेली हो
रानी बीनू हो ग़रभ के तिरियवा होरीला नाही जनमत सुनत सुख सोहर हो
एतना बचन रानी सुनली सुनहि नाही पावेली हो
रानी हाथे गोड़े तानेली चदरिया सुतेली कोपवाघर हो (कोपभवन)
सोने के खडौउआ राजा दशरथ केकयी महल चले
रानी तोरे बहिना बड़े रे वियोगावा त चली के मनावहु हो
एक हाथ लेली केकयी दतुअनि दुसरे हाथ पानी हो
केकयी झटकि के चढ़ेली अटरिया त बहिना मनावन हो
उठहु इ बहिना उठहु कहल मोर मानहु
बहिना उठिके करहु दतुअनिया होरिल तोरे होईहे सुनीह सुख सोहर हो
कवनाहिं मासे गंगा बढ़ियईहें सवार दहे लगिहन हो
बहिनी कवनही मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
सावन मासे गंगा बढ़ियईहें सेवर दहे लगिहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमेलें त बचन पूरण भईलें
सब सखि तेल लगावेली मंगल गावेली
रानी केकयी के जीयरा भे रोग सुनीके नाहि आवेली
सोने के खड़उआँ राजा दशरथ केकयी महल चलें
रानी कवन अवगुन मोसे भईलें सुनीके नाहि आवेलू हो
ना हम तेल लगाईब ना ही मंगल गाईबी राजा हो
ब्रम्हा के बान्हल पिरितिया उलटी राउरे दिहली।
सोहर पुत्र की जनम की अवसर पर धूम धाम से गावल जाला।
पुत्री की जनम पर पहिले सोहर ना गावल जात रहल ह बाकिर अब त गावल जाता।
ए सोहर में एगो ध्यान देबे वाली बाति बा राम के जनम हो गईल बा बाक़ी रानी कैकेयी के भारत के जनम अबे नईखे भईल। इसे राजा के कैकेयी पुत्र के राज देबे के बरदान गलत हो गईल बा।
राजा बिनु रे बदरी कहीं कजरी कहाँ जाई बरसेले हो
बोलिया त बोलेली रानी बोलही नाहीं पावेली हो
रानी बीनू हो ग़रभ के तिरियवा होरीला नाही जनमत सुनत सुख सोहर हो
एतना बचन रानी सुनली सुनहि नाही पावेली हो
रानी हाथे गोड़े तानेली चदरिया सुतेली कोपवाघर हो (कोपभवन)
सोने के खडौउआ राजा दशरथ केकयी महल चले
रानी तोरे बहिना बड़े रे वियोगावा त चली के मनावहु हो
एक हाथ लेली केकयी दतुअनि दुसरे हाथ पानी हो
केकयी झटकि के चढ़ेली अटरिया त बहिना मनावन हो
उठहु इ बहिना उठहु कहल मोर मानहु
बहिना उठिके करहु दतुअनिया होरिल तोरे होईहे सुनीह सुख सोहर हो
कवनाहिं मासे गंगा बढ़ियईहें सवार दहे लगिहन हो
बहिनी कवनही मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
सावन मासे गंगा बढ़ियईहें सेवर दहे लगिहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमिहें त बचन पूरन होईहें
बहिनी कातिक मासे राम जनमेलें त बचन पूरण भईलें
सब सखि तेल लगावेली मंगल गावेली
रानी केकयी के जीयरा भे रोग सुनीके नाहि आवेली
सोने के खड़उआँ राजा दशरथ केकयी महल चलें
रानी कवन अवगुन मोसे भईलें सुनीके नाहि आवेलू हो
ना हम तेल लगाईब ना ही मंगल गाईबी राजा हो
ब्रम्हा के बान्हल पिरितिया उलटी राउरे दिहली।
सोहर पुत्र की जनम की अवसर पर धूम धाम से गावल जाला।
पुत्री की जनम पर पहिले सोहर ना गावल जात रहल ह बाकिर अब त गावल जाता।
ए सोहर में एगो ध्यान देबे वाली बाति बा राम के जनम हो गईल बा बाक़ी रानी कैकेयी के भारत के जनम अबे नईखे भईल। इसे राजा के कैकेयी पुत्र के राज देबे के बरदान गलत हो गईल बा।
गणपति
गणपति
पहिल पूजा होला तोहार हो गौरी के ललनवा ।
गौरी के ललन, भोला के ललन गिरिजा के ललनवा।
बाँझिन को पुत्र देत, निर्धन को माया
कोढ़िन के काया
पहिल पूजा होला तोहार हो गौरी के ललनवा ।
गौरी के ललन, भोला के ललन गिरिजा के ललनवा।
बाँझिन को पुत्र देत, निर्धन को माया
कोढ़िन के काया
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