सोहर
दशरथ लाल बंगलवा त पानन छावल हो बहीनी सूती के उठेलें राजा दशरथ दुवरवा पर ठाढ़ भईले
अपने ओसरवा हेलिनिया त हेलावा से बात करे , हो हेला देखलीं निरबंसी के मुहवा दईबा कुशल डारेले
इतना बचन राजा सुनलें सुनाही नाही पावलें हो राजा गोड़ मुड़ तानेले चदरिया सोवेले धवरोहड़ि
पईठी जगावेली कोशिल्या रानी सुनी राजा दशरथ हो राजा अवंटल दुधवा सेरईले भोजनियाँ रउरे बिगदेले
भले बौरैइलू कौशिल्या रानी केही बौरावल ho raanii jatiiyaa ke patarii